Thursday, August 16, 2018

Ladnu

लाडनूं
लाडनूं भारतीय राज्य राजस्थान के नागौर जिले का एक शहर और नगर पालिका है। यह नागौर जिले का एक तहसील मुख्यालय है। यह जैन मंदिरों का शहर है और श्री महावीरजी के बाद जैन समुदाय के सबसे दौरे तीर्थस्थल स्थानों में से एक है। लाडनूं जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय, उत्कृष्ट संगमरमर के काम के जैन मंदिर, रामानंद गोशाला और धार्मिक और स्थापत्य महत्त्व के अन्य पुराने मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर पवित्र जैन मुनी आचार्य तुलसी के जन्मस्थान के रूप में भी प्रसिद्ध है। 15-20 किमी के भीतर (लाडनुं से)
सुजानगढ़ में डुंगर बालाजी, सालासर बालाजी धाम, तिरुपति बालाजी हैं। अभिनेता रजत बरमेचा का जन्म लाडनूं में ही हुआ था और अभी भी वो यहां वर्ष में कुछ दिन आते है।
लाडनूं में 1909 में रेलवे लाईन का विकास हुआ और बाद में 1933 में नगरपालिका, अस्पताल, सरकारी स्कूल, मदरसा, दाल मील, बिजली व्यवस्था आदि के बाद लाडनूं अपना विकास करने लगा !
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Ladnu Jain Mandir

परीचय
लाडनूं तहसील में 139 गांव है। निंबी जोधा, कसूंबी और सुनारी गांवों इनमें सबसे बड़े हैं और लाडनूं में 32 सरपंच और 100 से अधिक पंच हैं, लाडनूं के पास राजस्थान विधान सभा के तहत एमएलए सीट है और यह नागौर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। लाडनूं नगर पालिका में 32 निर्वाचित वार्ड सदस्य हैं। इसमें एक पंचायत समिति, तहसील और उप-डिवीजन कार्यालय, एक एसडीएम (सीजे) कोर्ट और एक स्टेडियम भी है। यह दिल्ली से 380 किमी पश्चिम और जयपुर के उत्तर-पश्चिम में 225 किमी है। इसकी आबादी लगभग है। 2001 की जनगणना के अनुसार 57,047। यह शहर अपने आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। प्रसिद्ध जैन विश्व भारती संस्थान (1970 में आचार्य तुलसी द्वारा स्थापित) यहां स्थित है। राजस्थान के लाडनूं में अनुवांशिक परिवर्तन, व्यवहारिक संशोधन और व्यक्तित्व के एकीकृत विकास के लिए विश्व भारती योग और ध्यान शिविर आयोजित किए जाते हैं।
इतिहास
राजस्थान के निर्माण से पूर्व लाडनूं, जोधपुर रियासत कि सीमा पर बसा एक महत्वपूर्ण कस्बा था। शिलालेखों तथा इतिहासविदों के अनुसार लाडनूं प्राचीन अहिछत्रपुर का हिस्सा था, जिस पर करीब 2000 वर्षो तक नागवंशीय राजाओं का अधिकार रहा। बाद में परमार राजपूतों ने उन से अहिछत्रपुर को छिन लिया, उनके बाद मुगल ने आधिपत्य जमाया। अन्ततः जोधपुर के राठौड राजाओं का अधिकार रहा।
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यह कस्बा एक प्राचिन व्यापारिक मार्ग पर बसा हुआ है। इस मार्ग से होकर कई लुटेरे गुजरे तो कभी हारी हुई सैनाये, पुरातात्विक साक्ष्य इसके 2000 वर्ष पहले से आबाद होने के सबूत देते हैं। वही 1857 के विद्रोह के कुचले जाने बाद हारे हुये सैनिक भागते हुये इधर से गुजरे तो वे इतिहास में कालो की फौज के नाम से दर्ज हुये।
जलवायु
गर्म गर्मी के साथ लाडनूं में शुष्क जलवायु है। गर्मी में रेतीले तूफान आना आम बात हैं। शहर का वातावरण चरम सूखापन, तापमान की बड़ी विविधता और अत्यधिक परिवर्तनीय वर्षा से विशिष्ट है। मार्च और जून ये सबसे गर्म महीने हैं। शहर में दर्ज अधिकतम तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के साथ 0 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे कम दर्ज तापमान के रूप में दर्ज है। शहर का औसत तापमान 23.5 डिग्री सेल्सियस है। सर्दी का मौसम मध्य नवंबर से मार्च की शुरुआत तक फैला हुआ है। बरसात का मौसम जुलाई से मध्य सितंबर तक एक छोटी अवधि का है। शहर में औसत वर्षा 36.16 सेमी और 51.5% आर्द्रता है।
नामकरण
लाडनूं को कहीं-कहीं 'बुडी चन्देरी' कहा जाता है, पर इसका प्रमाण कही नहीं मिलता। कई बार हम अपने आप को प्राचीनता से जोडने के लिऐ इतिहास के साथ जोड तोड करने की गलती करते हैं। इसी क्रम में चन्दनवरदाई लिखित प्रथ्वीराज-रासो में वर्णीत चन्देरी के साथ, लाडनू का सम्बध जोड कर प्राचीनतता पाने की कोशिश की गयी है। लाडनू नामकरण पर और भी कई कथाये ओर दन्तकथाये प्रचलीत है पर कोई भी प्रमाण या सम्पुर्ण तथ्य उपलब्ध नहीं हैं ।
कृषि
लाडनूं तहसील की अधिकांश आबादी का कृषि मुख्य व्यवसाय है। बाजरा, गेहूं, ज्वार, तिल, जौ और दालें लाडनूं की प्रमुख फसलें हैं। नवंबर में रबी फसलों को बोया जाता है जबकि खरीफ फसलों को जुलाई में पहली बार बारिश की शुरुआत के साथ बोया जाता है।
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जनसांख्यिकी
2001 की जनगणना के अनुसार,  लाडनूं की आबादी 57,047 थी। पुरुषों की 51% आबादी और महिलाएं 49% हैं। लाडनूं की औसत साक्षरता दर 60% है, जो राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक है । पुरुष साक्षरता 71% है, जबकि महिला साक्षरता 49% है। लाडनूं में, 17% आबादी 6 साल से कम आयु की है। लाडनूं तहसील का सबसे बड़ा गांव निंबी जोधा है जो लाडनूं से 15 किमी दूर है ।
Thanks you
Ydi aapko post ye post achi legi to eshy share kery or ydi aap cahte ho ki esme kuch bedlav kiya jana cahiye to aap nichy comment ker sekty hai

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